Bikaner Nagaur highway: राजस्थान में वाहन चालकों के लिए खुशखबरी, बीकानेर नागौर हाईवे पर बाईपास बनाने को मिली मंजूरी

Highway News: बीकानेर-नागौर हाईवे पर देशनोक आरओबी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस विवाद की गुथी को सुलझाने का रास्ता निकाल लिया। इस आरओबी के साथ दूसरा आरओबी न बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग एक बाईपास बनाने की योजना बना रहा है। यह बाईपास विभाग की 45 मीटर सरकारी भूमि पर प्रस्तावित है, जिसका उपयोग अब योजना के अनुसार होगा।

Bikaner-Nagaur highway: बीकानेर-नागौर हाईवे पर देशनोक आरओबी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस विवाद की गुथी को सुलझाने का रास्ता निकाल लिया। इस आरओबी के साथ दूसरा आरओबी न बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग एक बाईपास बनाने की योजना बना रहा है। यह बाईपास विभाग की 45 मीटर सरकारी भूमि पर प्रस्तावित है, जिसका उपयोग अब योजना के अनुसार होगा।

बीकानेर-नागौर हाईवे को फोरलेन बनाने की तैयारी है। इस रोड पर होने वाले हादसों की अधिकता के कारण डिवाइडर बनाने की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में विभाग अब उस फर्म से सलाह मशविरा कर रहा है, जिसे इस हाईवे की डीपीआर बनाने को कहा गया था।

पांच जून को एक टीम यहां निरीक्षण करने भी आएगी कि हादसों से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए। इसमें दो मुख्य बातें नजर आ रही हैं। पहली, देशनोक में बाईपास बनाया जाना था। बीकानेर और नागौर के बीच आने वाले सभी कस्बों में बाईपास होना चाहिए। दूसरी, हाईवे के बीच में डिवाइडर होना चाहिए, क्योंकि डिवाइडर नहीं होने से सड़क हादसे अधिक होते हैं।

हालांकि इन दोनों बातों को डीपीआर में शामिल करने को कहा गया है, लेकिन अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। पीडब्ल्यूडी का तर्क है कि सरकार चाहती है कि विभाग को 45 मीटर जमीन दी जाए, जिसका उपयोग बाईपास बनाने में किया जा सके। ^मेरी कोशिश पलाना रोड और जैसलमेर हाईवे के बीच चौड़ी सड़क बनाने की है, ताकि शहर के चारों ओर रिंग रोड जैसी संरचना बन सके।

इसके अलावा देशनोक-पलाना सहित सभी स्थानों से बीकानेर-नागौर हाईवे का बाईपास बनाया जाए। अभी डीपीआर तैयार की जा रही है। फर्म से विचार-विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। – केसाराम पंवार, एनएच पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता वर्तमान में बीकानेर के आसपास तीन तरफ हाईवे का निर्माण किया जा रहा है।

श्रीगंगानगर बाईपास से जयपुर-जोधपुर बाईपास, वहां से बाईपास से नागौर रोड और श्रीगंगानगर बाईपास से जैसलमेर हाईवे तक। हालांकि जैसलमेर हाईवे से नागौर हाईवे तक कोई सड़क या संपर्क मार्ग नहीं है। पीडब्ल्यूडी अब इस रोड से जैसलमेर तक फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए प्रस्ताव भी बनाया गया है।

इसके बनने के बाद अगर कोई नोखा से जैसलमेर जा रहा है तो उसे जयपुर-जोधपुर बाईपास का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, वह सीधे इसी हाईवे से जैसलमेर जा सकेगा। इसी तरह जैसलमेर से आने वाले किसी व्यक्ति को अगर नागौर जाना है तो उसे बीकानेर शहर के अंदर भी नहीं जाना पड़ेगा। शहर में डायवर्सन नहीं होंगे और भारी वाहनों का आवागमन भी कम होगा।

हालांकि पहले यह योजना बीकानेर-कोटपूतली ग्रीन हाईवे डीपीआर का हिस्सा थी, लेकिन अब इसके लिए अलग से प्रस्ताव बनाया गया है। शहर की सड़कों के लिए 30 करोड़ मिले, विधायक प्रस्ताव देंगे तो मानसून के बाद सुधरेंगे हालात। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पश्चिमी राजस्थान के विधायकों को सड़कों के लिए 15-15 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की राशि दी थी। बीकानेर पूर्व और पश्चिम सांसदों के लिए 15-15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

अगर नगर निगम भी कुछ प्रयास करे तो मानसून के बाद सड़कों पर 50 करोड़ रुपए खर्च किए जा सकते हैं। इतनी बड़ी रकम से शहर की हालत सुधारी जा सकती है। इसलिए अगर कलेक्टर और संभागायुक्त तीनों विभागों के साथ बैठकर योजना बनाएं तो काफी काम हो सकता है।

अगर विधायक जल्द हरी झंडी देते हैं तो मानसून सीजन में टेंडर किए जाएंगे और मानसून खत्म होते ही सड़कों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। मानसून के बाद पीडब्ल्यूडी ने करीब सवा दो करोड़ रुपए की लागत से पैचवर्क करवाया। बीडीए ने भी कुछ नई सड़कें बनाने के प्रस्ताव बनाए हैं।

 

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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